Thursday, September 10, 2015

तुम्ही से प्यार...

बंद आँखों से तेरा इंतज़ार करती हूं,
सुबह से शब् तक और शब् से सुबह तक तुझे याद बार बार करती हूं,
लो आज मैं ये इकरार करती हूं,
कि तन से रूह तक मैं सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूं। 
हर बात, हर एक मुलाकात, एक एक एहसास में शामिल हो,
तुम्ही चित, तुम्ही उचित, नहीं कभी अनुचित हो,
तेरे प्रत्येक कथन का सत्कार करती हूं ,
लो आज मैं ये इकरार करती हूं  कि  तन से रूह तक मैं सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूं। 
दो रोज की मोजूदगी व् एक घडी की ताक है,
जानती हुं बस वियोग ही इस प्रीत की नियति है,
अलगाव है कल के लिए, आज स्नेह को बरकरार करती हूं ,
लो आज मैं ये इकरार करती हूं  कि तन से रूह तक मैं सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूं। 
चाहे नमी से भर जाएँ दो नयन, किन्तु मुस्कुराएंगे दो अधर,
होगा वो लम्हा भी तुम्ही से ही अनिरुक्त,
उस पल का, उस क्षण का भी उतनी ही आतुरता से इंतज़ार करती हूं ,
लो आज मैं ये इकरार करती हुं कि तन से रूह तक मैं सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूं.… 

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