Saturday, November 1, 2008

मेरी चाहत...


मेरी चाहत को कोई नाम ना देना,
वफाओं का मेरी इनाम न देना,
याद आये जो मेरी तो लेना पुकार,
पर मुलाकात की मुझको गुहार ना देना ,
मेरी चाहत को कोई नाम ना देना...

महक तुम्हारी मेरी रूह में बसी है,
धडकनों को अपनी उधार ना देना,
हो जाये जो तुमको भी मुझसे मोहब्बत,
संग जीने मरने का करार ना देना,
मेरी चाहत को कोई नाम ना देना...

ख्वाब में मैंने देखा जो तुमको,
सो जाऊं इन बाहों में कर लूं पूरी तमन्ना,
देखा है मैंने तुमसे मिलन का जो ये सपना,
अधूरे इस स्वप्न को साकार ना करना,
मेरी चाहत को कोई नाम ना देना...

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